कामला, पीलिया (JAUNDICE) रोग-कारण एवं निदान

कामला, पीलिया (JAUNDICE) रोग – कारण एवं निदान

पीलिया (JAUNDICE) रोग परिचय, लक्षण एवं कारण :-इस रोग में शरीर की चमड़ी का रंग पीला पड़ जाता है। रोगी की आँखें तथा हाथ के नाखून आदि तक पीले पड़ जाते हैं।
कामला, पीलिया (JAUNDICE) रोग-कारण एवं निदान
कामला, पीलिया (JAUNDICE) रोग-कारण एवं निदान
Image Credit :- ayurvedabansko
यह रोग यकृत (जिगर) की खराबी से होता है। जिगर की नली में जब पथरी
अटक जाती है या किसी बीमारी के कारण पित्त की नली का रास्ता छोटा हो जाता है तो पित्त आँतों में नहीं पहुँचकर सीधा खून में मिलने लगता है।
खून में इसके मिलने से ही शरीर में पीलापन छा जाया करता है।


पीलिया (JAUNDICE) होने का कारण

वैसे आमतौर पर पौष्टिक भोजन न मिलना, पाचन क्रिया की गड़बड़ी, बहुत ज्यादा रजः स्राव या वीर्य नाश करना,बहुत दिनों तक खून जाने (गिरने) वाला रोग, बहुत दिनों तक मलेरिया ज्वर रहना,खुली हवा तथा सूर्य के प्रकाश की कमी आदि भी पीलिया रोग की उत्पत्ति में मुख्य भूमिका निभाते हैं।

पीलिया (JAUNDICE) के लक्षण

पीलिया (JAUNDICE) रोग में रोगी की आँखें, सारा शरीर नाखून और मूत्र पीला हो जाता है।
रोगी के मुँह का स्वाद कड़वा, जीभ पर मैल का लेप चढ़ जाना, भूख कम लगना आदि प्रधान लक्षण हो जाते हैं।
इस कारण से नाड़ी क्षीण, शरीर में खुजली,आलस्य, अनिद्रा, तथा दुर्बलता हो जाती है। नाड़ी की गति कभी-कभी 40-50 तक प्रति मिनट हो जाती है।


इस रोग का यदि समय पर इलाज न किया गया तो शोथ होकर त्वचा तथा श्लैष्मिक झिल्ली से रक्तस्राव होने लगता है।

पीलिया (JAUNDICE) उपचार

कारण के अनुसार चिकित्सा करें। कब्ज न रहने दें। आमाशय प्रक्षालन और बस्ति कर्म (एनीमा) उपयोगी है। खाने में कच्चे गूलर का रसदार शाक, गरम दूध, साबू-दाना, अनार, अरारोट, मौसम्मी, सन्तरा का रस दें। छेने का
जल दें।
सुपाच्य और लघु भोजन दें। यदि ज्वर हो तो साबूदाना, बार्ली तथा अरारोट
दें, बुखार न हो तो पुराने चावल का भात दें। मछली, खटाई, मिठाई, दूध घी, तेल,उड़द की दाल, बेसन की चीजें एवं मैदा की वस्तुएं न दें।
कामला पीलिया (JAUNDICE) नाशक कुछ घरेलू इलाज
  • ईख के गन्ने के टुकड़े करके रात्रि के समय घर के ऊपर छत पर खुले स्थान पर किसी बर्तन में रख दें। प्रात:काल नित्यक्रिया से फारिग हो, शुद्ध होकर इन्हें चूसने से पीलिया (JAUNDICE) में बहुत लाभ होता है।
  • कसौंदी के 2-4 पत्तों को 2 काली मरिच के दानों के साथ पीस छानकर प्रातः सायं पिलाना हितकारी है।



  • छाया-शुष्क अनार के पत्तों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में गाय के तक्र के साथ देने से पीलिया (JAUNDICE) में लाभ होता है।
  • अनन्नास के पके फल के 10 ग्राम रस में हल्दी का चूर्ण 2 ग्राम तथा मिश्री 3 ग्राम मिलाकर सेवन कराने से कामला में लाभ होता है।
  • आँवला चूर्ण के साथ थोड़ी सी लौह-भस्म मिलाकर सेवन कराने से कामला ठीक हो जाता है।
  • एक केले की फली पर भीगा हुआ चूना लगाकर रात्रि को बाहर ओस में रख दें। इसे प्रात: काल छीलकर रोगी को खिलायें। कामला में हितकारी है।
  • ग्वारपाठे का रस पिलाते रहने से पित्त-नलिका का अवरोध दूर होजाता है। कामला में हितकारी है।
  • ग्वारपाठे का रस पिलाते रहने से पित्त नलिका का अवरोध दूर होकर कामला में लाभ होता है। इसके रस का नस्म लेने से भी लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
  • गर्भवती को होने वाली कामला की प्रारम्भिक अवस्था में एरण्ड पत्रों का रस 10 ग्राम दूध के साथ मिलाकर प्रति दिन प्रात: 5 दिन तक पिलाने से कामला में लाभ होता है।
  • बेल के पत्तों को कूट-पीसकर कपड़े में रखकर निचोड़ें (रस निकालें) फिर इसमें 4-5 काली मिर्चों का चूर्ण मिलाकर पिलायें। कामला नाशक है।
  • पतली मूली के 40 ग्राम रस में 10 ग्राम शक्कर मिलाकर दिन में 3 बार पिलाना कामला रोग में लाभप्रद है।
  • उत्तम फिटकरी लेकर फूला बनायें। फिर इसको पीसकर प्रथम दिन 1 चुटकी, दूसरे दिन 2 चुटकी तथा तीसरे दिन 3 चुटकी तत्पश्चात 4 दिन और 3 चुटकी देकर ऊपर से गाय का दही पिलावें। इस प्रकार मात्र सात दिन में ही कामला नष्ट हो जाता है।
  • 6 ग्राम हल्दी को मट्ठे में मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करायें। भोजन में दही-भात खिलवायें। मात्र 4-5 दिन में कामला में लाभ हो जाता है।
  • सफेद चन्दन 5 ग्राम, आँवा हल्दी (पीसी हुई) 7 ग्राम लें। दोनों को शहद में मिलाकर प्रात: सायं मात्र सात दिन चटायें। कामला में लाभप्रद है।

NOTE:- किसी भी दवाई को या नुस्के को आजमाने से पहले किसी वैद्य या डॉक्टर की सलाह अवश्य ले।