बवासीर (Piles) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज

बवासीर (पाइल्स) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज Home Remedies for Piles

बवासीर (पाइल्स) piles in hindi  रोग परिचय, लक्षण एवं कारण :-यह रोग अधिकतर उन युवकों को जो अक्सर बैठे रहते हैं।
जिन्हें पुराना कब्ज हो, और जो अधिक मदिरापान करते हों तथा बूढ़ों को यह रोग प्रोस्टेट ग्रन्थि के बढ़ जाने के कारण और मूत्राशय में पथरी बन जाने से हो जाता है। (स्त्रियों को कम होता है).


बवासीर Piles के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज
बवासीर (Piles) के लक्षण, कारण, घरेलू इलाज
Image Credit:- myupchar
इस रोग में गुदाद्वार पर मस्से फूल जाते है। मलद्वार की नसें फूल जाने से वहाँ की त्वचा फूल कर सख्त हो जाती है और अंगूर की भाँति एक दूसरे से जुड़े हुए गुच्छे से उभर आते हैं।
जिनमें रक्त भी बहता है, उसे खूनी बबासीर के नाम से जाना जाता है और
जिसमें रक्त नहीं बहता, उसे बादी बबासीर के नाम से जाना जाता है।

बवासीर (पाइल्स) piles होने का क्या कारण

बवासीर (पाइल्स) piles होने का क्या कारण– इस रोग की उत्पत्ति कटु,अम्ल, लवण, विदाही, तीक्ष्ण एवं उष्ण पदार्थों के सेवन, मन्दाग्नि, बार-बार रेचक औषधियों के सेवन, शौचक्रिया के समय अधिक जोर लगाने तथा निरन्तर सवारी करना, विषम या कठिन आसन लगाने, लगातार बैठकर काम करने की प्रवृत्ति तथा व्यायाम का अभाव,शीतल स्थान पर अधिकतर बैठना, गुदा की शिराओं पर अधिक दबाव डालने के कारण (यथा-सगर्भता, उदर- श्रोणिगत अर्बुद, गर्भच्युति, विषम-प्रसूति आदि) वायु,.मल-मूत्र आदि के अधारणीय वेगों का रोकना अथवा बिना प्रवृत्ति के ही उन्हें त्यागने की कोशिश करना, यकृत की खराबी व अधिक मदिरापान से भी यह रोग हो जाता है।


खूनी बबासीर (पाइल्स) piles रक्तार्श

बबासीर (पाइल्स) piles रक्तार्श में जलन, टपकन, अकड़न और काटकर फेंकने जैसा
दर्द होता है। रोगी को बैठने में तकलीफ होती है। रोगी कब्ज के कारण दुःखी
रहता है, उसको पतले दस्त नहीं आते तथा उसके मल में प्राय: रक्त आया करता है।
मल त्याग करते समय अत्यन्त पीड़ा होती है जो पाखाना करने के बाद भी
देर तक होती रहती है। गुदा के चारों तरफ लाली हो जाती है। गुदा में दर्द,
जलन, खुजली होती रहती है। रोगी का चेहरा तथा पूरा शरीर नीला पड़ जाया
करता है।


बबासीर (पाइल्स) piles बादी बवासीर

बबासीर (पाइल्स) piles बादी बवासीर में गन्दी हवा (वायु) निकला करती है, रोगी के जोड़ों में टूटने जैसा दर्द होता है, उठते बैठते उसके जोड़ चटका करते है तथा रोगी को भूख कम लगती है इसके साथ ही उसकी जाँघों में भी पीड़ा बनी रहती है। रोगी प्रतिदिन कमजोर होता चला जाता है।

बबासीर (पाइल्स) piles के लिए उपचार 

बासीर (पाइल्स) piles  के लिए उपचार :-अर्श की चिकित्सा दो प्रकार से की जाती है।
  1. औषधि चिकित्सा
  2. शल्य चिकित्सा ।
इसमें कब्ज कतई न रहने दें। रोगी को ऐसा भोजन दिया जाना चाहिए जिससे मल साफ आये अन्यथा उसे एनीमा दें।
मिश्री मक्खन के साथ छिलका उतरे हुए तिल या भीगा हुआ चना रोज सवेरे देने से कब्ज दूर होगी सवेरे उठने पर तथा रात्रि को सोते समय एक गिलास गर्म पानी देने से भी कब्ज दूर होता है। मन पसन्द हल्का-फुल्का व्यायाम, प्रातः सायं नित्य करने का रोगी को निर्देश दें। शोथ की अवस्था में पूर्ण विश्राम की सलाह दें।


बबासीर (पाइल्स) piles के लिए पथ्य 

बबासीर (पाइल्स) piles के लिए पथ्य :-जिमीकन्द, पपीता, मक्खन, पिस्ता, बादाम, नाशपाती, सेब, पुराने चावल का भात, पका कोहड़ा, मट्ठा, दूध विशेषत: बकरी का, मिश्री व कच्ची मूली दें।

बबासीर (पाइल्स) piles के लिए अपथ्य

बबासीर (पाइल्स) piles के लिए अपथ्य :-चाय, काफी, रूखी चीजें, भुनी और उत्तेजक चीजें, मादक वस्तुएं, धूप या आग तापना, लहसुन, प्याज, मछली, माँस, उड़द की दाल, लाल भिर्च आदि खाना निषेध करा दें तथा टेढ़े होकर बैठना, घोड़े और ऊँट की सवारी करना, मल-मूत्र के वेगों को रोकना, मैथुन करना, उपवास करना, कठोर श्रम करना ,बहुत देर तक खड़ा रहना,अधिक समय तक बैठकर काम करना हानिकारक है।

बबासीर (पाइल्स) piles के लिए  कुछ घरेलु उपचार 

  1. अमरबेल का स्वरस 50 ग्राम काली मिर्च 5 नग का चूर्ण मिलाकर खूब घोटकर नित्य प्रातः पिलायें। 3 दिन में खूनी-वादी बबासीर में लाभ मिलेगा।
  2. कालीमिर्च तथा जीरे का मिश्रण बना लें उसमें सैंधा नमक मिलाकर दिन में 3-4 बार तक्र के साथ 3-4 माह लगातार दें। अर्श में लाभ होता है।
  3. छिलके सहित शुष्क निबौली कूटकर महीन चूर्ण कर लें, प्रतिदिन प्रातः बासी जल के साथ 10 ग्राम की मात्रा में सेवन करें, अर्श के रोगी को लाभ होगा।
  4. रीठे के छिलके को तबे पर जलाकर पीसें तथा इसके बराबर ही पपरिया कत्था मिलाकर खरल कर लें इस औषधि को 1 रत्ती की मात्रा में मक्खन या मलाई में मिलाकर अर्श रोगी को खिलायें, लाभ होगा।
  5. 4-6 या अधिक मूली के कन्द में से ऊपर का रेशा तथा पत्तों को अलग कर शेष कन्द को कूटकर रस निकालें। इस रस में 6 ग्राम घी मिलाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करने से रक्तार्श तथा शुष्कार्श में लाभ होता है।
  6. कमलकेशर 3 ग्राम, नागकेशर 3 ग्राम, शहद 3 ग्राम, चीनी 3 ग्राम तथा मक्खन 6 ग्राम सबको मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से रक्तार्श में लाभ होता है।
  7. करेलों के रस या करेले के पत्तों के रस 20 ग्राम में 10 ग्राम मिश्री मिलाकर प्रतिदिन सबेरे (सात दिन) पीने से रक्तार्श में लाभ होता है।
  8. हरड़, बहेड़ा, आँवला (त्रिफला) कूट, पीटकर (चूर्ण नहीं) को सायंकाल पानी में भिगोकर प्रात:काल मसल छानकर निहारमुँह पियें, अवश्य लाभ मिलेगा।
  9. लुगदी (बची हुई) को सिर तालू) पर रखें दिमाग व नजर को ताकत मिलेगी।
  10. पीली राल 50 ग्राम बारीक पीसें। इसका प्रतिदिन 6 ग्राम चूर्ण 125 ग्राम दही में मिलाकर सेवन करायें। खूनी बवासीर के लिए अचूक नुक्खा है। 2-3 दिन में ही लाभ मिलता है। सेवन कम से कम 1 सप्ताह करें।
  11. इन्द्रायण की जड़ को पानी में घिस कर मस्सों पर लगाने से (लेप करने से) अर्श की पीड़ा को तत्काल लाभ मिलता है।